वो एक औरत है

वो एक औरत है I

अबला नहीं, वो निडर है;

वो एक औरत है I

डरी सहमी सी चिड़िया नहीं,

वो शिकारी चील है;

वो एक औरत है I

मा की है ममता उसमें,

योद्धा सी हिम्मत है;

वो एक औरत है I

बेड़ियों में बंधी मुस्कुरा रही है,

अस्तित्व के लिए अपने दुनिया से वो लड़ रही है;

वो एक औरत है I

क्रूरता के इस कीचड़ में,

कमल सी वो खिल रही है;

वो एक औरत है I

बेशर्मों के पापों के कारण,

बेगुनाह शर्म से वो झुक रही है;

वो एक औरत है I

रूढ़ियों के भोज उठती,

अथक वो चल रही है;

वो एक औरत है.

वो एक औरत है.

Author: Aryan Sonsale

Editor: Amrita Pillai


3 views0 comments

Recent Posts

See All